जीवन में आने वाली विभिन्न समस्याओं, संकटों, बाधाओं, भय, आर्थिक परेशानी, शिक्षा, नौकरी, व्यापार, विवाह, संतान, पारिवारिक कलह, रोग, शत्रु-बाधा, मानसिक अशांति, कार्य में रुकावट, नकारात्मकता, भक्ति तथा सुख-शांति के लिए श्रीरामचरितमानस की इन प्रमुख चौपाइयों का श्रद्धापूर्वक पाठ किया जा सकता है।
अपनी समस्या के अनुसार संबंधित चौपाई का नियमित पाठ करें।
कठिन कार्य और बड़ी बाधाओं के लिए
कवन सो काज कठिन जग माहीं।
जो नहिं होइ तात तुम्ह पाहीं॥
पाठ विधि: मंगलवार या शनिवार को हनुमानजी का स्मरण करके 21 बार पाठ करें।
भारी संकट से मुक्ति के लिए
दीन दयाल बिरिदु संभारी।
हरहु नाथ मम संकट भारी॥
पाठ विधि: संकट के समय श्रीराम का स्मरण करके 21 बार पाठ करें।
विपत्ति से रक्षा के लिए
राजीव नयन धरे धनु सायक।
भगत विपत्ति भंजन सुखदायक॥
पाठ विधि: प्रतिदिन प्रातः या सायंकाल 21 बार पाठ करें।
चिंता और कठिन परिस्थिति के लिए
होइहि सोइ जो राम रचि राखा।
को करि तर्क बढ़ावै साखा॥
पाठ विधि: चिंता या कठिन निर्णय के समय 21 बार पाठ करें।
अमंगल दूर करने के लिए
मंगल भवन अमंगल हारी।
द्रवउ सो दसरथ अजिर बिहारी॥
पाठ विधि: पूजा के समय 11 या 21 बार पाठ करें।
सुख-संपत्ति और समृद्धि के लिए
जिमि सरिता सागर मँहु जाहीं।
जद्यपि ताहि कामना नाहीं॥
तिमि सुख संपत्ति बिनहि बोलाएँ।
धर्मशील पहिं जहँ सुभाएँ॥
पाठ विधि: शुक्रवार को दीपक जलाकर 21 बार पाठ करें।
सुख-संपत्ति की प्राप्ति के लिए
जे सकाम नर सुनहिं जे गावहिं।
सुख संपत्ति नाना बिधि पावहिं॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 21 बार श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
कर्म और सफलता के लिए
कर्म प्रधान बिस्व करि राखा।
जो जस करहिं सो तस फल चाखा॥
पाठ विधि: महत्वपूर्ण कार्य से पहले 11 बार पाठ करें।
वैर-विरोध से बचने के लिए
बयरु न कर काहू सन कोई।
राम प्रताप बिषमता खोई॥
पाठ विधि: मंगलवार या शनिवार को 21 बार पाठ करें।
सद्बुद्धि और विपत्ति से बचाव के लिए
सुमति कुमति सब कें उर रहहीं।
नाथ पुरान निगम अस कहहीं॥
जहँ सुमति तहँ संपति नाना।
जहँ कुमति तहँ बिपति निदाना॥
पाठ विधि: प्रतिदिन प्रातः 11 या 21 बार पाठ करें।
विवेक और सत्संग के लिए
बिनु सतसंग बिबेक न होई।
राम कृपा बिनु सुलभ न सोई॥
सतसंगत मुद मंगल मूला।
सोइ फल सिधि सब साधन फूला॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 11 बार श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
परोपकार और शुभ कर्म के लिए
पर हित सरिस धरम नहिं भाई।
पर पीड़ा सम नहिं अधमाई॥
पाठ विधि: प्रतिदिन पूजा के समय 11 बार पाठ करें।
कलह और दूसरों से होने वाले कष्ट से बचने के लिए
परहित बस जिन्ह कें मन माहीं।
तिन्ह कहुँ जग दुर्लभ कछु नाहीं॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 11 बार पाठ करें।
विपत्ति में धैर्य के लिए
धीरज धरम मित्र अरु नारी।
आपद काल परखिए चारी॥
पाठ विधि: कठिन समय में 11 बार पाठ करें।
सकारात्मक भावना और मन की शांति के लिए
जाकी रही भावना जैसी।
प्रभु मूरति तिन्ह देखी तैसी॥
पाठ विधि: प्रतिदिन पूजा के समय 11 बार पाठ करें।
गुरु-कृपा और ज्ञान के लिए
गुर बिनु भव निधि तरइ न कोई।
जौं बिरंचि संकर सम होई॥
पाठ विधि: गुरुवार को 11 बार पाठ करें !
गुरु-वंदना के लिए
बंदउँ गुरु पद पदुम परागा।
सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥
पाठ विधि: पढ़ाई या महत्वपूर्ण कार्य से पहले 11 बार पाठ करें।
शिक्षा और विद्या के लिए
गुरु गृहँ गए पढ़न रघुराई।
अलप काल बिद्या सब आई॥
पाठ विधि: विद्यार्थी पढ़ाई शुरू करने से पहले 11 बार पाठ करें।
मनुष्य जीवन और सद्कर्म के लिए
बड़ें भाग मानुष तनु पावा।
सुर दुर्लभ सब ग्रंथिन्ह गावा॥
पाठ विधि: प्रतिदिन प्रातः 11 बार पाठ करें।
श्रीराम-प्रेम और भक्ति के लिए
रामहि केवल प्रेमु पिआरा।
जानि लेउ जो जाननिहारा॥
पाठ विधि: प्रतिदिन प्रातः या सायंकाल 11 बार पाठ करें।
भक्ति और दुखों से मुक्ति के लिए
राम भगति मनि उर बस जाकें।
दुख लवलेस न सपनेहुँ ताकें॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 11 या 21 बार पाठ करें।
सर्वांगीण मंगल और श्रीराम-भक्ति के लिए
सिय राममय सब जग जानी।
करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥
पाठ विधि: प्रतिदिन पूजा के समय 21 बार पाठ करें।
विवाह में बाधा दूर करने के लिए
जय जय गिरिराज किशोरी।
जय महेस मुख चंद चकोरी॥
पाठ विधि: सोमवार को शिव-पार्वती का स्मरण करके 21 बार पाठ करें।
योग्य जीवनसाथी की कामना के लिए
मनु जाहिं राचेउ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर साँवरो।
करुना निधान सुजान सीलु सनेहु जानत रावरो॥
पाठ विधि: सोमवार को शिव-पार्वती का पूजन करके 21 बार पाठ करें।
विवाह और दांपत्य मंगल के लिए
सुनु सिय सत्य असीस हमारी।
पूजिहि मन कामना तुम्हारी॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 21 बार पाठ करें।
परिवार में प्रेम और सुख-शांति के लिए
सब नर करहिं परस्पर प्रीती।
चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥
पाठ विधि: परिवार की सुख-शांति के लिए 11 बार पाठ करें।
संतान के सुख और कल्याण के लिए
प्रेम मगन कौसल्या निसिदिन जात न जान।
सुत सनेह बस माता बालचरित कर गान॥
पाठ विधि: संतान के कल्याण की प्रार्थना करते हुए 21 बार पाठ करें।
आर्थिक कष्ट और दरिद्रता की प्रार्थना के लिए
नहिं दरिद्र कोउ दुखी न दीना।
नहिं कोउ अबुध न लच्छन हीना॥
पाठ विधि: शुक्रवार को दीपक जलाकर 21 बार पाठ करें।
शारीरिक, दैविक और भौतिक कष्टों के लिए
दैहिक दैविक भौतिक तापा।
राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥
पाठ विधि: प्रतिदिन प्रातः 21 बार पाठ करें।
नौकरी, व्यापार और आजीविका में सफलता के लिए
सकल पदारथ हैं जग माहीं।
करमहीन नर पावत नाहीं॥
पाठ विधि: कार्य पर जाने से पहले 11 बार पाठ करें।
लक्ष्य और दृढ़ संकल्प के लिए
जामवंत के बचन सुहाए।
सुनि हनुमंत हृदय अति भाए॥
पाठ विधि: मंगलवार या शनिवार को 21 बार पाठ करें।
साहस और आत्मविश्वास के लिए
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
जलधि लाँघि गए अचरज नाहीं॥
पाठ विधि: परीक्षा, महत्वपूर्ण कार्य या चुनौती से पहले 21 बार पाठ करें।
रोग और स्वास्थ्य-कष्ट में
राम कृपाँ नासहिं सब रोगा।
जौं एहि भाँति बनै संजोगा॥
सदगुर बैद बचन बिस्वासा।
संजम यह न बिषय कै आसा॥
रघुपति भगति सजीवन मूरी।
अनूपान श्रद्धा मति पूरी॥
एहि बिधि भलेहिं सो रोग नसाहीं।
नाहिं त जतन कोटि नहिं जाहीं॥
पाठ विधि: स्वास्थ्य की प्रार्थना करते हुए श्रद्धापूर्वक पाठ करें। आवश्यक चिकित्सा जारी रखें।
अमंगल दूर करने और चार पुरुषार्थ की कामना के लिए
जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं।
सकल अमंगल मूल नसाहीं॥
करतल होहिं पदारथ चारी।
तेइ सिय रामु कहेउ कामारी॥
पाठ विधि: प्रातः श्रीसीताराम का स्मरण करके 21 बार पाठ करें।
श्रीराम-कृपा और सद्बुद्धि के लिए
जा पर कृपा राम की होई।
ता पर कृपा करहिं सब कोई॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 11 बार पाठ करें।
सत्य और वचन की दृढ़ता के लिए
रघुकुल रीति सदा चलि आई।
प्राण जाए पर बचन न जाई॥
पाठ विधि: किसी शुभ संकल्प या महत्वपूर्ण कार्य से पहले 11 बार पाठ करें।
रामनाम से शोक-मुक्ति के लिए
चहुँ जुग तीनि काल तिहुँ लोका।
भए नाम जपि जीव बिसोका॥
बेद पुरान संत मत एहू।
सकल सुकृत फल राम सनेहू॥
पाठ विधि: प्रतिदिन श्रीराम नाम का स्मरण करते हुए 11 या 21 बार पाठ करें।
भव-भय और आध्यात्मिक संकट से मुक्ति के लिए
कवनिउ सिद्धि कि बिनु बिस्वासा।
बिनु हरि भजन न भव भय नासा॥
पाठ विधि: प्रतिदिन प्रातः या सायंकाल 11 बार पाठ करें।
कामना और मन की अशांति के लिए
बिनु संतोष न काम नसाहीं।
काम अछत सुख सपनेहुँ नाहीं॥
राम भजन बिनु मिटहिं कि कामा।
थल बिहीन तरु कबहुँ कि जामा॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 11 बार श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
संसार के मोह और मन की शांति के लिए
उमा कहउँ मैं अनुभव अपना।
सत हरि भजनु जगत सब सपना॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 11 बार श्रीराम का स्मरण करते हुए पाठ करें।
रामभक्ति और परम सुख के लिए
सब कर मत खगनायक एहा।
करिअ राम पद पंकज नेहा॥
श्रुति पुरान सब ग्रंथ कहाहीं।
रघुपति भगति बिना सुख नाहीं॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 11 या 21 बार श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
🚩 हनुमान चालीसा की विशेष चौपाइयाँ
संकट और पीड़ा से मुक्ति के लिए
संकट कटै मिटै सब पीरा।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
पाठ विधि: मंगलवार या शनिवार को 11 बार पाठ करें।
रोग और पीड़ा से मुक्ति की प्रार्थना के लिए
नासै रोग हरै सब पीरा।
जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 11 बार पाठ करें। आवश्यक चिकित्सा जारी रखें।
भय और नकारात्मक प्रभाव से रक्षा के लिए
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥
पाठ विधि: मंगलवार या शनिवार को 11 बार पाठ करें।
मन, कर्म और वचन से संकट मुक्ति के लिए
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥
पाठ विधि: संकट के समय 11 बार पाठ करें।
सभी कार्यों में हनुमानजी की सहायता के लिए
सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥
पाठ विधि: महत्वपूर्ण कार्य से पहले 11 बार पाठ करें।
मनोरथ और उचित कामना के लिए
और मनोरथ जो कोई लावै।
सोइ अमित जीवन फल पावै॥
पाठ विधि: अपनी उचित मनोकामना का संकल्प लेकर 11 बार पाठ करें।
साधु-संत और धर्म की रक्षा के लिए
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥
पाठ विधि: मंगलवार या शनिवार को 11 बार पाठ करें।
सिद्धि और समृद्धि की प्रार्थना के लिए
अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
अस बर दीन जानकी माता॥
पाठ विधि: मंगलवार या शनिवार को 11 बार पाठ करें।
जन्म-जन्म के दुखों से मुक्ति और श्रीराम-भक्ति के लिए
तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥
पाठ विधि: प्रतिदिन 11 या 21 बार पाठ करें।
सर्वसुख और हनुमानजी की कृपा के लिए
और देवता चित्त न धरई।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई॥
पाठ विधि: मंगलवार या शनिवार को 11 बार पाठ करें।
🚩 बजरंग बाण की विशेष चौपाइयाँ
कार्य में विलंब और बाधा के लिए
जय हनुमंत संत हितकारी।
सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज बिलंब न कीजै।
आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
पाठ विधि: विशेष संकट या कार्य में अत्यधिक बाधा होने पर श्रद्धा और संयम के साथ पाठ करें।
कठिन कार्य और संकट में सहायता के लिए
जैसे कूदि सिंधु महि पारा।
सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका।
मारेहु लात गई सुरलोका॥
पाठ विधि: कठिन कार्य या बड़ी बाधा के समय 1, 3 या 11 बार पाठ करें।
शत्रु-बाधा और संकट से रक्षा के लिए
भूत प्रेत पिशाच निशाचर।
अगिन बेताल काल मारी मर॥
इन्हें मारु तोहि सपथ राम की।
राखु नाथ मरजाद नाम की॥
पाठ विधि: विशेष भय या संकट की स्थिति में श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
संकट में तत्काल हनुमानजी की शरण के लिए
जय जय जय हनुमंत अगाधा।
दुख पावत जन केहि अपराधा॥
पाठ विधि: अत्यंत कठिन परिस्थिति में हनुमानजी का ध्यान करके पाठ करें।
सभी शुभ कार्यों की सिद्धि के लिए
निश्चय प्रेम प्रतीति ते।
बिनय करैं सनमान॥
तेहि के कारज सकल शुभ।
सिद्ध करैं हनुमान॥
पाठ विधि: किसी उचित कार्य के लिए संकल्प लेकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
🔱 विशेष पाठ-विधि
इन सभी चौपाइयों में से अपनी समस्या के अनुसार संबंधित चौपाई का चयन करें। स्नान करके स्वच्छ स्थान पर दीपक जलाएँ और श्रीसीताराम तथा हनुमानजी का स्मरण करके श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
सामान्य पाठ: 11 या 21 बार
विशेष संकल्प: 21 या 41 दिनों तक नियमित पाठ
विशेष श्रद्धा: 51 या 108 बार पाठ किया जा सकता है।
यदि किसी एक समस्या के लिए विशेष साधना करनी हो तो उसी विषय की एक चौपाई चुनकर नियमित पाठ करना अधिक सरल रहेगा। एक साथ सभी चौपाइयों का पाठ करना आवश्यक नहीं है।
धार्मिक पाठ के साथ समस्या के अनुसार आवश्यक कर्म, पुरुषार्थ, चिकित्सा, शिक्षा, रोजगार, आर्थिक प्रयास, कानूनी सलाह अथवा अन्य व्यावहारिक उपाय भी करते रहें।