बच्चों की कुशलता, अच्छे स्वास्थ्य, विद्या, एकाग्रता, आज्ञाकारिता, जिद्दी स्वभाव, लड़ाई-झगड़े, भय तथा नज़र आदि से बचाव के लिए निम्नलिखित पारंपरिक उपाय बताए गए हैं।
🕉️ गणेश जी का उपाय — बुद्धि और एकाग्रता के लिए
बुधवार को बच्चे से भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करवाएँ।
“ॐ गं गणपतये नमः” का 21 या 108 बार जाप करवाएँ।
इसके बाद बच्चे को पढ़ाई के लिए बैठाएँ।
📚 माँ सरस्वती का उपाय — पढ़ाई में मन लगाने के लिए
प्रतिदिन पढ़ाई शुरू करने से पहले माँ सरस्वती का स्मरण करवाएँ।
“ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” का 21 बार जाप करें।
बुधवार या बसंत पंचमी के दिन किसी जरूरतमंद विद्यार्थी को कॉपी, पुस्तक और पेन दान करना शुभ माना जाता है।
☀️ सूर्यदेव का उपाय — स्वास्थ्य और आत्मविश्वास के लिए
सुबह बच्चे से सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करवाएँ।
“ॐ सूर्याय नमः” का 11 बार जाप करें।
बच्चे को सुबह की हल्की धूप और नियमित खेल-कूद की आदत भी डालें।
🔱 जिद और क्रोध के लिए शिवजी का उपाय
सोमवार को बच्चे के हाथ से शिवलिंग पर साफ जल अर्पित करवाएँ।
कुछ मिनट शांत बैठकर भगवान शिव का ध्यान करवाएँ।
बच्चे को समझाएँ कि गुस्सा आने पर पहले शांत होना है, फिर अपनी बात कहनी है।
🚩 लड़ाई-झगड़े और चिड़चिड़ेपन के लिए
मंगलवार को बच्चे को हनुमान जी के दर्शन करवाएँ।
गुड़-चना का भोग लगाकर प्रसाद दें।
बच्चा सक्षम हो तो हनुमान चालीसा का पाठ करवाया जा सकता है।
🧿 नज़र लगने पर उपाय
शनिवार या मंगलवार को सेंधा नमक की थोड़ी मात्रा बच्चे के चारों ओर घुमाकर घर से बाहर बहते पानी या उचित स्थान पर छोड़ने की पारंपरिक विधि अपनाई जाती है।
इसे धार्मिक एवं पारंपरिक मान्यता के रूप में ही करें। बच्चे की तबीयत खराब हो तो चिकित्सा सहायता लेने में देरी न करें।
🌿 घर में सकारात्मक वातावरण
घर के पूजा स्थान पर नियमित दीपक जलाएँ और बच्चे के सामने गाली-गलौज, मारपीट तथा अत्यधिक झगड़े से बचें।
बच्चों पर घर के वातावरण का गहरा प्रभाव पड़ता है।
📖 पढ़ाई में कमजोरी के लिए विशेष नियम
रोज एक निश्चित समय पर पढ़ाई करवाएँ।
पढ़ाई के समय मोबाइल और टीवी बंद रखें।
25–30 मिनट पढ़ाई के बाद छोटा ब्रेक दें।
बच्चा जो काम अच्छी तरह करे, उसकी तुरंत प्रशंसा करें।
दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
😡 जिद्दी बच्चे के लिए सबसे जरूरी उपाय
बच्चे की हर जिद पूरी न करें, लेकिन हर बात पर डाँटें भी नहीं।
घर के 3–4 स्पष्ट नियम बनाएँ और माता-पिता दोनों उन्हीं नियमों का पालन करवाएँ।
बच्चे को विकल्प दें—जैसे:
“पहले पढ़ाई करोगे या पहले खाना खाओगे?”
इससे अनावश्यक टकराव कम हो सकता है।
🔮43 दिनों का नियमित रूप से संकल्प करें
सुबह सूर्य को जल → गणेश जी का स्मरण → सरस्वती मंत्र → निश्चित समय पर पढ़ाई → शाम को खेल/व्यायाम।
इस दौरान बच्चे को “जिद्दी”, “कमजोर” या “बिगड़ा हुआ” कहने से बचें।
सकारात्मक शब्दों में समझाना अधिक उपयोगी रहता है।
🧛♂️ बच्चा कहना न माने, लड़ाई-झगड़ा करे, जिद्दी स्वभाव हो या गलत संगति में पड़ रहा हो तो पारंपरिक टोटका
मंगलवार के दिन 1 रोटी बनानी है। उस पर देशी घी लगाकर उसके ऊपर थोड़ी-सी गुड़ की शक्कर रख दें।
फिर बच्चे का हाथ उस रोटी पर लगवाकर घर से बाहर जाएँ और किसी भी कुत्ते को वह रोटी खिला दें।
कुत्ता किसी भी रंग का हो, ऐसा पारंपरिक रूप से माना जाता है कि उपाय किया जा सकता है।
यह उपाय मंगलवार को 3 या 4 मंगलवार तक करने की परंपरा बताई जाती है।
💐 मान्यता के अनुसार इससे बच्चे के पढ़ाई करने, स्वभाव में सुधार आने, माता-पिता की बात मानने और गलत संगति से बचने में सहायता मिल सकती है।
🥛 बच्चे को दूध न पचता हो या माँ का दूध पीते ही उल्टी करता हो तो पारंपरिक उपाय
यदि किसी बच्चे को दूध न पचता हो अथवा वह माँ का दूध पीते ही उल्टी कर देता हो, तो शनिवार के दिन सवा सौ ग्राम कच्चा दूध लेकर बच्चे के ऊपर से सात बार उतारें।
इसके बाद वह दूध किसी काले कुत्ते को पिला दें।
नोट: छोटे बच्चे को बार-बार दूध पीने के बाद उल्टी हो तो चिकित्सकीय सलाह लेना भी आवश्यक है।
👿 बच्चे को अंधेरे में भय लगता हो या अकेले में जाने से घबराता हो तो उपाय
यदि किसी बच्चे को अंधेरे में भय लगता हो अथवा कहीं अकेले में जाने में घबराहट होती हो, तो शुक्ल पक्ष के मंगलवार को श्री हनुमान चालीसा की छोटी-सी पुस्तक की व्यवस्था करें।
उस पुस्तक को भगवान हनुमान जी को अर्पित करें।
प्रभु के दाएँ कंधे के सिंदूर से पुस्तक पर तिलक करें।
बच्चे को सामने लाल आसन पर बैठाकर उस पुस्तक में से श्री हनुमान चालीसा का 11 बार पाठ करें।
इसके बाद पारंपरिक विधि के अनुसार उस पुस्तक का छोटा रूप तैयार करके किसी तांबे के ताबीज में रखकर बच्चे को धारण करवाया जाता है।
🧿 बच्चे को जल्दी-जल्दी नज़र लगती हो तो उपाय
यदि किसी बच्चे को बार-बार नज़र लगती हो, तो मंगलवार के दिन बच्चे को सामने बिठाकर श्री हनुमान बाहुक का 5 बार पाठ करें।
प्रत्येक पाठ के बाद पारंपरिक विधि के अनुसार बच्चे की ओर हल्का फूँक करें।
इसके बाद एक तांबे का कड़ा लेकर उसे भगवान के चरणों में अर्पित करें और बच्चे के दाएँ हाथ में धारण करवा दें।
🌺 बच्चों की कुशलता के लिए विशेष ध्यान
इन सभी उपायों को धार्मिक एवं पारंपरिक आस्था के रूप में किया जा सकता है। साथ ही बच्चे को अच्छा भोजन, पर्याप्त नींद, खेल-कूद, पढ़ाई का नियमित समय, अच्छा पारिवारिक वातावरण और माता-पिता का प्रेम देना भी बहुत जरूरी है।
यदि बच्चे में लगातार गंभीर व्यवहार संबंधी समस्या, पढ़ाई में अत्यधिक कठिनाई, बहुत अधिक आक्रामकता, नशे की समस्या या स्वास्थ्य संबंधी परेशानी दिखाई दे, तो उचित चिकित्सकीय अथवा विशेषज्ञ की सलाह भी अवश्य लें।