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✦ Ghrelu Upaay📅 04 Oct 2026

बुरी नज़र से बचने के उपाय और नज़र दोष निवारण के पारंपरिक टोटके

ॐ
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बुरी नज़र या नज़र दोष को लेकर भारतीय परंपराओं में अनेक घरेलू और धार्मिक उपाय प्रचलित हैं। नज़र लगने की आशंका होने पर लोग अपनी श्रद्धा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार इन उपायों को करते हैं। नीचे दिए गए उपायों में सामग्री, विधि और उसके बाद की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से दी गई है।

छोटे बच्चों की सुरक्षा सबसे पहले

छोटे बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। दूध पीने वाले बच्चे को नज़र उतारने के नाम पर कोई भी चीज खिलाएं-पिलाएं नहीं। बच्चे को धुएं, आग, जलती हुई मिर्च या कपूर के बिल्कुल पास न ले जाएं। आंखों में काजल या कोई घरेलू पदार्थ भी न डालें।

यदि बच्चा दूध नहीं पी रहा है, लगातार उल्टी कर रहा है, बहुत सुस्त है, लगातार रो रहा है, बुखार है या सांस लेने में परेशानी हो रही है, तो इसे केवल नज़र दोष न मानें और चिकित्सकीय सलाह लें।

सेंधा नमक से नज़र उतारने का उपाय

सामग्री: थोड़ा-सा सेंधा नमक और एक गिलास साफ पानी।

विधि: सेंधा नमक को हाथ में लेकर नज़र लगे व्यक्ति के सिर से पैर तक 7 बार वारकर उतारें। इसके बाद नमक को गिलास के पानी में डाल दें और नमक वाला पानी नाली में बहा दें। अंत में हाथ धो लें।

इसे नज़र दोष दूर करने का पारंपरिक घरेलू उपाय माना जाता है।

सात लाल मिर्च से नज़र उतारने का उपाय

सामग्री: डंठल वाली 7 सूखी लाल मिर्च।

विधि: सातों लाल मिर्च एक साथ लेकर नज़र लगे व्यक्ति के सिर से पैर तक 9, 11 या 21 बार वारें। इसके बाद मिर्च को सुरक्षित स्थान पर जलती हुई आग में डालने की परंपरा है।

सावधानी: छोटे बच्चों को धुएं या आग के पास बिल्कुल न ले जाएं।

नींबू से नज़र उतारने का उपाय

सामग्री: 1 साबुत नींबू।

विधि: नींबू को हाथ में लेकर नज़र लगे व्यक्ति के सिर से पैर तक 7 बार उल्टी दिशा में घुमाकर उतारें। इसके बाद नींबू को बीच से काट दें। पारंपरिक मान्यता के अनुसार दोनों टुकड़ों को घर से दूर दक्षिण दिशा की ओर छोड़ दिया जाता है।

  1. व्यापार या दुकान की नज़र के लिए नींबू-काली मिर्च-सरसों का उपाय

सामग्री: 5 कागजी नींबू, 1 मुट्ठी काली मिर्च और 1 मुट्ठी पीली सरसों।

विधि: रविवार दोपहर पांचों नींबुओं को काटकर दुकान या व्यवसाय स्थल पर रखें। उनके साथ काली मिर्च और पीली सरसों भी रख दें। अगले दिन दुकान खोलते समय इन सभी वस्तुओं को वहां से हटा दें और व्यवसाय स्थल से दूर किसी उचित स्थान पर मिट्टी में दबा दें।

यह उपाय विशेष रूप से व्यापार में नज़र लगने की पारंपरिक मान्यता से जोड़ा जाता है।

राई और सेंधा नमक से नज़र उतारने का उपाय

सामग्री: थोड़ी राई (काली सरसों) और थोड़ा सेंधा नमक।

विधि: दोनों को एक साथ हाथ में लेकर नज़र लगे व्यक्ति के सिर से पैर तक 7 बार वारें। इसके बाद इस सामग्री को घर के बाहर किसी उचित स्थान पर डाल दें या बहते पानी में प्रवाहित करने की पारंपरिक विधि अपनाएं।

काले तिल से नज़र उतारने का उपाय

सामग्री: थोड़े-से साबुत काले तिल।

विधि: काले तिल हाथ में लेकर नज़र लगे व्यक्ति के सिर के ऊपर से नीचे की ओर 7 बार वारकर उतारें। इसके बाद उन तिलों को घर के अंदर न रखें और घर के बाहर किसी उचित स्थान पर डाल दें।

दूध से नज़र उतारने का पारंपरिक उपाय

सामग्री: थोड़ा-सा दूध और एक मिट्टी का बर्तन।

विधि: शनिवार या रविवार को दूध लेकर नज़र लगे व्यक्ति के सिर से पैर तक 3 या 7 बार वारें। इसके बाद दूध को मिट्टी के बर्तन में डालकर कुत्ते को देने की लोकपरंपरा है।

छोटे बच्चे के लिए: बच्चे को यह दूध बिल्कुल न पिलाएं। बच्चे के ऊपर से केवल बाहरी रूप से वारकर दूध अलग कर दें।

तेल लगी रोटी का उपाय

सामग्री: एक रोटी और थोड़ा-सा सरसों का तेल।

विधि: रोटी पर थोड़ा तेल लगाएं। इसे नज़र लगे व्यक्ति के सिर से पैर तक 7 बार वारकर उतारें। इसके बाद रोटी को काले कुत्ते को खिलाने की पारंपरिक मान्यता है।

गुलाब की 7 पंखुड़ियों का उपाय

सामग्री: 1 पान और गुलाब की 7 ताजी पंखुड़ियां।

विधि: पान में सात गुलाब की पंखुड़ियां रखें। इष्टदेव का स्मरण करके इसे उस व्यक्ति को खिलाने की परंपरा है जिसे नज़र लगी होने की आशंका हो।

नोट: छोटे बच्चों को यह उपाय न दें।

कपूर से नज़र उतारने का उपाय

सामग्री: कपूर और कपूरदानी या सुरक्षित दीपक।

विधि: कपूर को सुरक्षित स्थान पर जलाकर बड़े व्यक्ति की नज़र उतारने के लिए उसके चारों ओर हल्के हाथ से आरती की तरह घुमाएं। इसके बाद कपूर को पूरी तरह बुझने दें और स्थान को साफ कर दें।

छोटे बच्चे के लिए: कपूर को बच्चे के चेहरे या शरीर के पास न घुमाएं और बच्चे को धुएं के पास बिल्कुल न रखें। धार्मिक रूप से करना हो तो कपूर को बच्चे से काफी दूर सुरक्षित स्थान पर जलाकर केवल इष्टदेव की आरती और प्रार्थना करें।

हनुमान जी का स्मरण

मंगलवार या शनिवार को स्नान करके हनुमान जी की पूजा करें। दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें और नज़र तथा नकारात्मक प्रभाव से रक्षा की प्रार्थना करें। इसे नियमित रूप से श्रद्धा के साथ करने की धार्मिक मान्यता है।

काले धागे की पारंपरिक विधि

सामग्री: साफ काला धागा।

विधि: काले धागे को हाथ या पैर में बांधने की परंपरा है। छोटे बच्चे के लिए धागा ढीला रखें ताकि रक्त संचार पर दबाव न पड़े। यदि त्वचा पर लाल निशान, सूजन या जलन दिखाई दे तो धागा तुरंत हटा दें।

काले घोड़े की नाल का उपाय

काले घोड़े की नाल को घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाने की लोकपरंपरा है। नाल को मजबूती से लगाएं और इस बात का ध्यान रखें कि उससे किसी व्यक्ति को चोट लगने का खतरा न हो।

इसे नज़र और टोने-टोटके से घर की रक्षा का पारंपरिक उपाय माना जाता है।

कौड़ियों का तोरण

सामग्री: साफ कौड़ियां और उन्हें बांधने के लिए धागा।

विधि: कौड़ियों का तोरण बनाकर घर के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाएं। इसे नज़र-टोना से बचाव और घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने की पारंपरिक मान्यता है।

👶 छोटे बच्चों की नज़र उतारने के सरल पारंपरिक उपाय

नमक और राई का उपाय

सामग्री: थोड़ा सेंधा नमक और थोड़ी राई।

विधि: दोनों को हाथ में लेकर बच्चे से सुरक्षित दूरी रखते हुए उसके ऊपर से 7 बार उल्टी दिशा में वारें। इसके बाद सामग्री को बच्चे से दूर कर दें और घर के बाहर उचित स्थान पर डाल दें।

बच्चे को धुआं देने या इस सामग्री को खिलाने-पिलाने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है।

दूध पीने वाले बच्चे के लिए पारंपरिक दूध वाला उपाय

यदि बच्चे के दूध पीने में अचानक कमी को नज़र लगने से जोड़ा जा रहा हो, तो थोड़ा-सा कच्चा दूध लेकर बच्चे के ऊपर से 7 बार वारने की लोकपरंपरा है। इसके बाद दूध को बच्चे से दूर कर दें।

बच्चे को यह दूध पिलाना नहीं है।

बच्चे के लिए काला धागा

बच्चे को नज़र से बचाने के लिए हाथ या पैर में काला धागा बांधने की पारंपरिक मान्यता है। धागा बहुत कसकर न बांधें और बच्चे की त्वचा पर किसी प्रकार का निशान या दबाव दिखाई दे तो तुरंत हटा दें !

परिवार और घर की नज़र से बचाव

यदि परिवार में बार-बार नज़र लगने की आशंका हो तो नियमित पूजा-पाठ, हनुमान चालीसा, इष्टदेव का स्मरण और घर में दीपक जलाने की परंपरा अपनाई जा सकती है। इसे धार्मिक रूप से सकारात्मक वातावरण बनाए रखने का सरल उपाय माना जाता है।

महत्वपूर्ण सावधानी

ऊपर दिए गए उपाय पारंपरिक लोकमान्यताओं और धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं। इनके परिणाम की वैज्ञानिक गारंटी नहीं है।

यदि बच्चे या बड़े व्यक्ति को लगातार उल्टी, बुखार, कमजोरी, बेहोशी, सांस लेने में परेशानी, बच्चा दूध न पी रहा हो या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या हो, तो उसे केवल नज़र दोष मानकर उपचार में देरी न करें और चिकित्सकीय सलाह अवश्य लें।

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